राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ेर मालाखेड़ा अलवर में सैगल फाउंडेशन के द्वारा रिनोवेशन का कार्य किया गया सम्पन्न .
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ेर , मालाखेड़ा ,अलवर में सैगल फाउंडेशन के द्वारा रिनोवेशन का कार्य किया गया
सैगल फाउंडेशन द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ेर में रिनोवेशन: शिक्षा के मंदिर को नई पहचान
शिक्षा समाज के विकास की सबसे अहम नींव होती है। जब किसी विद्यालय की भौतिक स्थिति अच्छी होती है, तब विद्यार्थियों को न केवल अच्छा शैक्षिक वातावरण मिलता है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और सीखने की उत्सुकता भी बढ़ती है। इसी सोच को आत्मसात करते हुए सैगल फाउंडेशन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ेर में रिनोवेशन (नवीनीकरण) का कार्य किया, जो शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।
विद्यालय की पृष्ठभूमि
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ेर एक ऐसा शैक्षणिक संस्थान है जो वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा प्रदान करता आ रहा है। यहां के शिक्षक समर्पित हैं और विद्यार्थी भी मेहनती हैं, लेकिन विद्यालय की अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) समय के साथ जर्जर हो गई थी। भवन की दीवारें टूट रही थीं, छतों से पानी टपकता था, शौचालयों की स्थिति दयनीय थी और पीने के पानी की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी। इन हालातों में भी विद्यालय शिक्षण कार्य जारी रखे हुए था, परंतु सुविधाओं के अभाव ने छात्रों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता पर प्रतिकूल असर डाला।
रिनोवेशन कार्य की प्रमुख विशेषताएँ
सैगल फाउंडेशन द्वारा किए गए रिनोवेशन कार्य में निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
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कक्षाओं का नवीनीकरण:
सभी कक्षाओं की दीवारों और छतों की मरम्मत की गई। नई रंगाई-पुताई से कक्षाएं आकर्षक और साफ-सुथरी दिखाई देने लगीं। खिड़कियों और दरवाजों की मरम्मत भी की गई। -
बिजली और वेंटिलेशन की व्यवस्था:
सभी कक्षाओं में नई वायरिंग, लाइट्स और पंखे लगाए गए ताकि छात्र गर्मी और अंधेरे से परेशान न हों। -
शौचालयों का निर्माण एवं सुधार:
लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्वच्छ और सुरक्षित शौचालयों का निर्माण किया गया, जिससे छात्राओं की उपस्थिति में खासा सुधार देखने को मिला। -
पीने के पानी की सुविधा:
फिल्टर्ड पेयजल की व्यवस्था की गई ताकि बच्चे बीमारियों से सुरक्षित रहें और स्वच्छ पानी आसानी से उपलब्ध हो सके। -
विद्यालय परिसर का सौंदर्यीकरण:
परिसर में पौधारोपण, बैठने की उचित व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यालय अब हराभरा और आकर्षक दिखता है। -
सीखने के लिए प्रेरणादायक वातावरण:
दीवारों पर शिक्षाप्रद चित्र और स्लोगन बनाए गए, जिससे विद्यार्थियों को प्रेरणा मिले और वे शिक्षण के प्रति रुचि बनाए रखें।
सामूहिक प्रयास की मिसाल
इस रिनोवेशन कार्य को सफल बनाने में न केवल सैगल फाउंडेशन, बल्कि विद्यालय के शिक्षक, ग्राम पंचायत, अभिभावक और स्वयं विद्यार्थी भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। यह सामूहिक सहयोग ही इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत रहा। विद्यालय के प्रधानाचार्य और स्टाफ ने लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखा जिससे कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण हो सका।
रिनोवेशन के बाद का असर
रिनोवेशन के बाद विद्यालय में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले:
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छात्रों की उपस्थिति में सुधार हुआ है।
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छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ा है क्योंकि उन्हें अब बेहतर शौचालय सुविधा मिली है।
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अभिभावकों का विद्यालय पर विश्वास बढ़ा है और वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति अधिक सजग हो गए हैं।
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शिक्षकों को भी अब एक सकारात्मक वातावरण में पढ़ाने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है।
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स्थानीय समुदाय में शिक्षा को लेकर जागरूकता और भागीदारी में वृद्धि हुई है।
प्रेरणा का स्रोत
सैगल फाउंडेशन की यह पहल न केवल एक विद्यालय के कायाकल्प की कहानी है, बल्कि यह एक प्रेरणा है उन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों के लिए जो समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। यह उदाहरण बताता है कि यदि सही नीयत और संगठित प्रयास हों, तो कोई भी बदलाव असंभव नहीं होता।
निष्कर्ष
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का यह कायाकल्प केवल ईंट और सीमेंट का काम नहीं था, बल्कि यह शिक्षा के मंदिर को नया जीवन देने का प्रयास था। सैगल फाउंडेशन ने यह दिखा दिया कि यदि हम ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में निवेश करें, तो वहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी भी महान ऊँचाइयाँ छू सकते हैं।



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